आज़ादी मिले हुए हमें ६० साल हो गये.कल स्वन्तत्रता दिवस की ६१वीं वर्षगांठ है.हम खुशनसीब हैं कि हम आज़ाद भारत में सांस ले रहे हैं,किन्तु यहां यह प्रश्न उठना स्वाभाविक है कि क्या वास्तव में हम आज़ाद हैं ?चौंकिये मत,हमारे देश में हमें हर प्रकार की आज़ादी मिली हुई है,किसी को भी गाली देने की आज़ादी,किसी की भी पिटाई करने की आज़ादी,शराब पीकर गाडी चलाते हुए लोगों को कुचल देने की आज़ादी,क्रूरतापूर्ण हत्या करने की आज़ादी,मासूम बच्चियों/अबलाओं का बलात्कार करने की आज़ादी,गरीबों के शोषण की आज़ादी,कानून की धज्जियां उडाने की आज़ादी.कहां तक गिनाऊं,हम कितने आज़ाद हैं?
देखा जाये तो ६० वर्ष का मनुष्य हर तरह से परिपक्व हो जाता है,जवानी में की हुई गलतियों से सीख लेते हुए क्रमश: सुधार की ओर बढता है,किन्तु यदि हम अपने देश के विगत ६० वर्षों को देखें तो पता चलता है कि अभी तो अल्हडता इसकी रगों में बह रही है.हर क्षेत्र मे प्रगति करते हुए भी अभी हम खुशहाली से बहुत दूर हैं.देश के चरित्र का तो कहना ही क्या.देश चलाने वाले लोगों में ईमानदार लोग उंगलियों पर गिने जा सकते हैं.भ्रष्ट और आपराधिक बैकग्राउण्ड वाले लोग हमारे देश को चला रहे हैं.इससे ज़्यादा दुर्भाग्य हमारे देश के गरीबों का क्या होगा कि सरकारी अस्पतालों में इलाज के लिये उन्हें हर कदम पर रिश्वत देनी पडती है. हमारे देश का किसान आत्महत्या करने को मजबूर हो गया है.स्कूल /कालेज में प्रवेश के लिये रिश्वत देते हुए छात्र के मन में यह बात घर कर जाती है कि कमाते वक्त मैं भी रिश्वत लूंगा.जो ईमानदार हैं,उन्हें ये सिस्टम लील जाता है.मै यहां कोई नयी बात नहीं कर रही हूं,सबको पता है. हमारे यहां "चलता है",ये दो शब्द हर भारत वासी के मन में अन्दर तक बैठ गये हैं,या बैठा दिये गये हैं.हम क्यूं हर गलत बात को स्वीकार कर लेते है,गलत को गलत कहने में और सही को सही कहने में हमारी ज़बान क्यूं लडखडाती है? हम किससे डरते हैं? हम अपने बच्चों को निडर बनना कब सिखायेंगे?
अभी तो हमें कई आयामों पर आज़ादी हासिल करनी है.अशिक्षा से आज़ादी,गरीबी और बेरोज़गारी से आज़ादी,सडी गली परंपराओं और कुरीतियों से आज़ादी,भ्रष्टाचार और बेइमानी से आज़ादी,सच बोलने की आज़ादी.हमारे दिलो दिमाग को हिंसा से आज़ादी कब मिलेगी? ब्रेनड्रेन से आज़ादी कब मिलेगी? कब विदेशों से पढ कर आने वाले छात्र अपने देश में नौकरी करने में गर्व महसूस करेंगे? हम सब डर से कब आज़ाद होंगे? "सब चलता है",इन तीन शब्दों से हमें आज़ादी कब मिलेगी ?
हम सभी यदि अपने स्तर पर आज़ादी की मुहिम चलायें तो मुझे यकीन है कि जब हम सब अपने बच्चों को आज़ादी का महत्व और सही मतलब समझाने में कामयाब हो जायेंगे,तो एक स्वतन्त्रता दिवस ऐसा भी आयेगा कि हमको तो तिरंगे पर नाज़ होगा ही,तिरंगा भी हम पर नाज़ करके इठलाता हुआ फ़हराएगा.जय हिन्द.
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Wednesday, August 13, 2008
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